अंत्योदय और पर्यावरण का पावन संगम : कमार आवासीय परिसर बना हरित मॉडल

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प्रधानमंत्री के नाम ‘वटवृक्ष’ और मुख्यमंत्री के नाम ‘पीपल’ का रोपण
​सेवा संकल्प अभियान के तहत 36 कमार परिवारों को मिला आशियाना; जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और कलमकारों ने रोपे जीवन के अंकुर

​कुरूद। प्रकृति के नैसर्गिक आंचल में विशेष संरक्षित जनजाति कमार परिवारों के जीवन में उस समय एक नई सुबह का उजास बिखरा, जब ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘पीएम जन-मन योजना’ के अंतर्गत मशान डबरा स्थित नवनिर्मित आवासीय परिसर 36 कमार परिवारों को विधिवत सुपुर्द किया गया। कंक्रीट की चारदीवारियों को केवल एक मकान न रखकर, उसे जीवन और प्राणवायु से परिपूर्ण एक ‘आदर्श हरित मॉडल’ के रूप में पिरोने का अनुपम संकल्प इस अवसर पर साकार हुआ। पर्यावरण संरक्षण और सनातन आस्था के समन्वय के रूप में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर अमरत्व के प्रतीक ‘वटवृक्ष’ (बरगद) तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम पर देवतुल्य ‘पीपल’ का पौधा रोपित कर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की गई।

​सनातन प्रतीकों से प्रकृति संरक्षण का संदेश
भारतीय संस्कृति में वटवृक्ष दीर्घायु, छाया और संरक्षण का अधिष्ठान है, तो पीपल निरंतर प्राणवायु प्रदान करने वाला देववृक्ष। परिसर को प्रकृति-सम्मत और हरित आवरण से आच्छादित करने के उद्देश्य से शीर्ष नेतृत्व के नाम इन वृक्षों का रोपण किया गया। इसके साथ ही उपस्थित जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और लोकतंत्र के सजग प्रहरी पत्रकारों के नाम पर भी नारियल, नींबू सहित विविध फलदार और औषधीय प्रजातियों के सैकड़ों पौधे लगाए गए, जिससे रोपने वाले और पौधे के बीच एक भावनात्मक सेतु स्थापित हो सके।
​”ईंट-गारे की दीवारों से परे, गरिमामय जीवन-परिवेश का निर्माण ही वास्तविक विकास”
समारोह के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने अंत्योदय की मूल भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि मशान डबरा का यह आवासीय परिसर समूचे छत्तीसगढ़ में जन-सरोकार और समावेशी विकास का मानक बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा—​”विकास की सार्थकता केवल छत और दीवारें उपलब्ध कराने में नहीं, बल्कि वंचित से वंचित परिवार को एक स्वस्थ, सुरम्य और गरिमामय जीवन-परिवेश देने में है। 36 कमार परिवारों को सौंपा गया यह आवास केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि उनके स्वाभिमान और सुरक्षित भविष्य का नया अध्याय है। लगाए गए इन पौधों की देखरेख यदि हम अपनी संतानों की भांति करेंगे, तभी यह धरा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरी-भरी और जीवनदायिनी बनी रहेगी।”

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​राजनीतिक परिधि से परे संवेदना और समाजसेवा की साधना
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भाजपा जिलाध्यक्ष प्रकाश बैस एवं मुख्य अतिथि ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व केवल सत्ता या राजनीति की सीमाओं में नहीं बंधा होता, बल्कि यह समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन को संवारने का निरंतर अनुष्ठान है। कमार परिवारों के व्यवस्थित पुनर्वास और परिसर के समग्र सौंदर्यीकरण को इसी सामाजिक दायित्व का प्रतिफल बताया गया।

​प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों की त्रिवेणी ने रोपे पौधे
इस पुनीत आयोजन में प्रशासनिक दक्षता और जनभागीदारी का अद्भुत तालमेल देखने को मिला। मंच पर जनपद अध्यक्ष महेश गोटा, जनपद उपाध्यक्ष हृदय साहू, भाजपा जिला महामंत्री महेंद्र पंडित, रवि दुबे, नागेंद्र शुक्ला, रामभुवन साहू, जनपद सदस्य राजेश नाथ गोसाईं, मोहन पुजारी, पिंकी, शिवराज शाह, प्रेमलता नागवंशी, सुलोचना साहू, चेलेश्वरी साहू, विकल गुप्ता, सांकरा सरपंच नागेंद्र बोर्झा, सचिव मदन सेन, रवि भट्ट और हनी कश्यप सहित अनेक स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
​प्रशासनिक संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एसडीएम मनोज मरकाम, तहसीलदार शिवेंद्र सिन्हा, नायब तहसीलदार विवेक चंद्राकर, जनपद पंचायत सीईओ विमल कुमार साहू, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के एसडीओ एस.के. ठाकुर, महिला एवं बाल विकास अधिकारी सोमेंद्र कुमार साहू तथा बीपीएम हितेंद्र कुमार साहू ने श्रमदान कर पौधरोपण किया। जिले भर से पहुंचे पत्रकारों ने भी अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता निभाते हुए इस हरित यज्ञ में आहुति दी। ​मशान डबरा का यह नवनिर्मित परिसर अब केवल 36 परिवारों की रिहाइश का ठिकाना नहीं, बल्कि प्रकृति, संवेदना और जनसहयोग से पल्लवित होने वाला एक ऐसा हरित तीर्थ बनने की दिशा में अग्रसर है, जहां विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक बनकर सांस ले रहे हैं।

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