UPI पेमेंट पर चार्ज लगने की चर्चाओं के बीच फोनपे के CEO समीर निगम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि UPI के जरिए पेमेंट करने वाले ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। उनके मुताबिक, UPI अभी भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह फ्री है और आगे भी मुफ्त ही रहेगा। समीर निगम ने आज यानी 8 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए यह बात कही।
क्यों शुरू हुई UPI पर चार्ज की चर्चा?
लोकसभा में नए टैक्स संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद UPI ट्रांजैक्शन पर संभावित चार्ज को लेकर चर्चा तेज हो गई। खासकर कुछ UPI ट्रांजैक्शनों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने की संभावना को लेकर बहस शुरू हुई। इसी के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या भविष्य में UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहकों को भी कोई चार्ज देना पड़ेगा। हालांकि, समीर निगम ने साफ कर दिया है कि भारत के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म UPI पर उपभोक्ताओं से किसी भी तरह का चार्ज नहीं लिया जाएगा।
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी कही ये बात
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने भी साफ किया है कि आम लोगों के लिए UPI पेमेंट फ्री रहेगा। इसके साथ ही, छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को UPI पेमेंट स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं देना होगा। PCI ने X पर जारी एक पोस्ट में कहा कि जहां भी मर्चेंट सर्विस चार्ज लागू होता है, वह व्यापारी और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच का व्यावसायिक समझौता होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि UPI या डिजिटल पेमेंट करने वाले ग्राहकों से कोई शुल्क लिया जाएगा।
क्या UPI पेमेंट महंगा होने वाला है?
आम UPI यूजर्स के लिए इसका जवाब नहीं है। फोनपे के CEO समीर निगम और PCI दोनों ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों को UPI से पैसे भेजने या पेमेंट करने के लिए कोई चार्ज नहीं देना होगा। फिलहाल विवाद इस बात को लेकर है कि कुछ बिजनेस से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट पर MDR लगाया जा सकता है या नहीं। टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के तहत सरकार को कुछ चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यमों पर MDR लगाने का अधिकार दिया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ बिजनेस UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक MDR लगाया जा सकता है। हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI पेमेंट इस प्रस्तावित चार्ज के दायरे में नहीं आएंगे। इसका मतलब है कि प्रस्तावित व्यवस्था का फोकस आम लोगों के बीच होने वाले पैसे के लेनदेन पर नहीं, बल्कि पात्र मर्चेंट और बिजनेस ट्रांजैक्शन पर है।
MDR क्या होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने से जुड़ा चार्ज है। आमतौर पर यह चार्ज व्यापारी की ओर से उस संस्था को दिया जाता है, जो पेमेंट ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने में शामिल होती है। UPI पर अब तक ज्यादातर ट्रांजैक्शन बिना MDR के प्रोसेस होते रहे हैं। UPI का पूरा सिस्टम चलाने का खर्च बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और इससे जुड़े दूसरे संस्थान उठाते रहे हैं।
UPI पर MDR की चर्चा क्यों शुरू हुई?
कुछ बिजनेस ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की संभावना ने यह बहस तेज कर दी है कि भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आगे आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे बनाया जाए। UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और इसके पीछे टेक्नोलॉजी, पेमेंट प्रोसेसिंग और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होता है। अभी इस खर्च को पेमेंट सिस्टम से जुड़े अलग-अलग संस्थान वहन करते हैं। इसलिए मौजूदा चर्चा का मुख्य सवाल यह है कि भविष्य में बढ़ते UPI ट्रांजैक्शन के खर्च को किस मॉडल से पूरा किया जाएगा, न कि आम उपभोक्ताओं से UPI इस्तेमाल करने का चार्ज लिया जाएगा।
